रांची समेत झारखंड के बाजार में प्याज की कीमतों में तेजी ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। देश की प्रमुख नासिक मंडी में एक महीने के भीतर प्याज के थोक भाव में करीब 76 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसका असर झारखंड के बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। रांची की पंडरा थोक मंडी में प्याज अब 35 से 42 रुपए किलो तक बिक रहा है, जबकि खुदरा बाजार में भाव 45 से 50 रुपए किलो तक पहुंच गया है। कारोबारियों के अनुसार 14 अगस्त को पंडरा मंडी में प्याज 28 से 30 रुपए किलो था। इसके बाद महज कुछ दिनों में भाव तेजी से चढ़कर 42 रुपए किलो तक पहुंच गया। रांची में प्याज की आपूर्ति मुख्य रूप से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से होती है। देशभर में आवक कमजोर रहने का असर स्थानीय मंडियों पर भी पड़ रहा है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार 22 अगस्त को प्याज का राष्ट्रीय औसत थोक भाव 3397 रुपए प्रति क्विंटल और खुदरा भाव 41.64 रुपए किलो रहा। एक महीने पहले खुदरा कीमत 34.95 रुपए किलो थी। यानी खुदरा बाजार में भी करीब 19 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है।
इसे भी पढ़ें: झारखंड में अगले तीन दिन बदला रहेगा मौसम, कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी हुई
दक्षिण भारत की नई फसल का इंतजार
रांची के कारोबारियों का कहना है कि इस बार प्याज की नई फसल बाजार में आने में देरी हो रही है। सामान्य तौर पर सावन की शुरुआत तक दक्षिण भारत की मंडियों से नई फसल की आवक रांची शुरू हो जाती थी, लेकिन इस साल मौसम की अनिश्चितता और खरीफ प्याज की बोआई में देरी के कारण स्थिति बदली हुई है। दूसरी ओर रबी प्याज का स्टाक भी धीरे-धीरे कम हो रहा है। यही वजह है कि पुरानी फसल और नई फसल के बीच का अंतराल लंबा हो गया है और कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। पंडरा आलू-प्याज व्यवसायी संघ के सचिव रोहित कुमार के अनुसार दक्षिण भारत से नई फसल की आवक अगले दो सप्ताह में शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद मंडियों में प्याज की उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों में राहत मिलने की संभावना है। कारोबारियों के मुताबिक रांची की मंडियों में फिलहाल रोजाना करीब 10 से 12 ट्रक प्याज पहुंच रहे हैं। सावन के कारण आवक में मामूली कमी जरूर हुई है, लेकिन अभी तक थोक बाजार में आपूर्ति पूरी तरह बाधित नहीं हुई है।

रांची में फिलहाल करना पड़ सकता है इंतजार
रांची के उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल सबसे बड़ी उम्मीद दक्षिण भारत से आने वाली नई फसल है। कारोबारियों का कहना है कि अगले दो सप्ताह में नई फसल की आवक शुरू होने के बाद मंडियों में उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों में नरमी आ सकती है। इसलिए तत्काल राहत के लिए उपभोक्ताओं को करीब दो सप्ताह इंतजार करना पड़ सकता है। बाजार में प्याज के साथ अन्य सब्जियों के भाव भी गुणवत्ता और आवक के हिसाब से अलग-अलग बने हुए हैं। पंडरा मंडी में सफेद आलू 7 से 8 रुपए, लाल आलू 10 से 12 रुपए और एलटी आलू 11 से 14 रुपए किलो बिक रहा है। लहसुन का भाव 60 से 170 रुपए किलो और अदरक 130 से 140 रुपए किलो तक है। कारोबारियों के मुताबिक प्याज की कीमतों में मौजूदा तेजी मुख्य रूप से आवक के अंतर के कारण है। नई फसल नियमित रूप से बाजार में पहुंचते ही आपूर्ति की स्थिति सुधरने और भाव नीचे आने की उम्मीद है। हालांकि तब तक खुदरा बाजार में 45 से 50 रुपए किलो का भाव आम उपभोक्ताओं की रसोई पर अतिरिक्त बोझ डालता रहेगा।
इसे भी पढ़ें: दो साल में 73 लाख किसान फसल बीमा योजना से बाहर, क्लेम में देरी और कम मुआवजे से किसानों का भरोसा घटा
बफर स्टाक से प्याज उतारने की तैयारी में सरकार
कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार अब बफर स्टाक से प्याज बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। हालांकि इस बार सरकारी खरीद लक्ष्य से काफी पीछे है, जिससे बफर स्टाक को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस वर्ष सरकार ने दो लाख टन प्याज खरीद का लक्ष्य रखा था, लेकिन जुलाई के अंत तक करीब 1.20 लाख टन ही खरीद हो सकी। खुले बाजार में बेहतर कीमत मिलने के कारण किसानों ने सरकारी एजेंसियों को प्याज बेचने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद सरकार ने खरीद मूल्य में कई बार बढ़ोतरी की, लेकिन खरीद लक्ष्य के अनुरूप नहीं पहुंच सकी। विशेषज्ञों और कारोबारियों का मानना है कि अगस्त-सितंबर में प्याज के भाव सामान्य तौर पर बढ़ते हैं, क्योंकि इस दौरान रबी प्याज का स्टाक घटता है और खरीफ प्याज की आवक शुरू होने में समय लगता है। ऐसे में बफर स्टाक से प्याज निकालना बाजार को अस्थायी राहत दे सकता है, लेकिन स्टाक सीमित होने के कारण इसका असर कितने समय तक रहेगा, यह बड़ा सवाल है।