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आलू या शकरकंद की खेती, किसकी खेती से किसानों को होता है अधिक मुनाफा

भारतीय कृषि में विविधता तेजी से बढ़ रही है. अब किसान पारंपरिक फसलों की खेती को छोड़कर उन फसलों और सब्जियों की खेती को अधिक कर रहे हैं जिसकी बाजार में मांग अधिक है और जिससे किसानों को मुनाफा भी अधिक होता है. इस तरह पारंपरिक रूप से आलू की खेती करने वाले किसान अब शकरकंद (Sweet Potato) की उन्नत खेती की ओर भी रुख कर रहे हैं. आलू और शकरकंद दोनों की कंद होते हैं और जमीन के अंदर तैयार होते हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि लागत, पैदावार और मुनाफे के लिहाज से कौन किसकी खेती करना किसानों के लिए अधिक फायदेमंद होता है.

आलू और शकरकंद

यद्यपि आलू और शकरकंद दोनों ही कंदवर्गीय (Tuberous Root) सब्जियां हैं और दिखने में काफी हद तक एक जैसी लगती हैं, लेकिन वैज्ञानिक रूप से ये दोनों बिल्कुल अलग हैं. आलू ‘सोलानेसी’ (Solanaceae यानी नाइटशेड) परिवार से संबंधित है, जबकि शकरकंद ‘कॉन्वॉल्वुलेसी’ (Convolvulaceae यानी मॉर्निंग ग्लोरी) परिवार का हिस्सा है. ये दोनों मूल रूप से मध्य और दक्षिण अमेरिका की फसलें हैं.

बाजार में मांग

शकरकंद में आलू की तुलना में फाइबर और विटामिन ए की मात्रा बहुत अधिक होती है. प्रति 100 ग्राम शकरकंद में 3.3 ग्राम फाइबर और दैनिक आवश्यकता (DV) का 107% विटामिन ए होता है, जबकि आलू में केवल 2.1 ग्राम फाइबर और 0.1% विटामिन ए होता है. इसके अलावा, शकरकंद का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) अपेक्षाकृत कम (44 से 94) होता है, जिससे मधुमेह के रोगियों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. जबकि आलू की मांग घरेलू खपत के साथ-साथ प्रसंस्करण उद्योगों (चिप्स, फ्रेंच फ्राइज़ और स्टार्च बनाने) में बहुत मजबूत है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक देश है, जहाँ सालाना लगभग 58-60 मिलियन टन आलू उगाया जाता है.

 

उत्पादन, लागत और मुनाफा

शकरकंद की खेती में फायदा यह होता है कि यह फसल मात्र 110 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है. प्रति एकड़ इसकी पैदावार 8 से 10 टन (80-100 क्विंटल) तक होती है. प्रति एकड़ इसकी खेती की कुल लागत मात्र 38,000 से 40000 रुपये तक आती है. वर्तमान बाजार में शकरकंद की औसत कीमत लगभग 25 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम तक है. इसकी खेती करके किसान प्रति एकड़़ 1.6 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं. जबकि इसके मुकाबले आलू से किसानों को इतना अधिक लाभ नहीं पाता है. इसमें मेहनत और पूंजी अधिक लगती है.

बाजार में वर्तमान कीमतें

भारतीय मंडियों में आलू की औसत थोक कीमत 12 रुपये लेकर 20 रुपये प्रति रिलोग्राम तक बिकती है. विशेष किस्मों जैसे लाल नैनीताल आलू की कीमत 21.9 रुपये प्रति किलो और जालंधर आलू की कीमत 24.7 रुपये प्रति किलो तक दर्ज की गई है. वहीं शकरकंद की बाजार में बिकने वाली थोक दरें लगभग 25 से 30 रुपये प्रति किलो के बीच हिक ही है.

जैविक खेती और सिंचाई

शकरकंद की खेती जैविक तरीके से करने के लिए सड़े हुए गोबर की लगभग 20 से 25 टन खाद का उपयोग किया जा सकता है. इसे बहुत कम सिंचाई (केवल 3 से 4 बार) की आवश्यकता होती है. हालांकि आलू की खेती में भी जैविक बदलावों पर अध्ययन किए जा रहे हैं. शकरकंद की खेती में फायदा यह है कि यह बेहद कम समय में तैयार होती है. सिंचाई की बेहद कम आवश्यकता, कम लागत में भारी बचत और तेजी से बढ़ता निर्यात बाजार (जिसमें भारत वर्तमान में दुनिया में छठे स्थान पर है