रांची। मोरहाबादी मैदान में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं सामने रखीं। उन्होंने कहा कि राज्य की आत्मा खेतों में बसती है और किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं। सरकार का जोर खेती को सहारा देने के साथ उसे लाभकारी बनाने और किसान को कृषि-उद्यमी के रूप में आगे बढ़ाने पर रहेगा।
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खेती को कई आय के साधनों से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को सिंचाई, बीज, समर्थन मूल्य, कृषि यंत्रीकरण और विभिन्न योजनाओं के जरिए मजबूत किया जा रहा है। फल, सब्जी, बागवानी, डेयरी, मत्स्य पालन, कुक्कुट और बकरी पालन के साथ मधुमक्खी पालन, लाह, तसर, मिलेट, औषधीय पौधों और लघु वनोपज आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत करीब 2,150 एकड़ में वृक्षारोपण हुआ है और करीब 3 लाख परिवारों को आजीविका के नए साधनों से जोड़ा गया है। इस योजना के तहत उत्पादित आम का विदेशों में निर्यात भी किया गया है।
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महिलाओं को बाजार और उद्यम से जोड़ने की कोशिश
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को भी सरकार की ग्रामीण विकास नीति का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि 3.25 लाख से अधिक सखी मंडलों से करीब 35 लाख परिवार जुड़े हैं। इन समूहों को करीब 3,000 करोड़ की चक्रीय निधि एवं सामुदायिक निवेश निधि और 20,000 करोड़ का बैंक क्रेडिट लिंकेज उपलब्ध कराया गया है। सखी मंडल की दीदियों के उत्पादों को ‘पलाश ब्रांड’ के जरिए बाजार देने की कोशिश की जा रही है। गुमला के ‘जोहार रागी मिशन’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि 2022 में 10 महिलाओं से शुरू हुआ यह प्रयास अब 35 हजार से अधिक किसानों और 500 से अधिक महिला शेयरधारकों की आजीविका से जुड़ चुका है।
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हर जिले में स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग का लक्ष्य
हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य की आर्थिक ताकत केवल बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि छोटे उद्यमियों, कारीगरों, बुनकरों, हस्तशिल्पियों और महिला स्वयं सहायता समूहों से भी बनती है। सरकार का लक्ष्य हर जिले में स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग विकसित करना और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है, ताकि युवाओं को अपने जिले में ही रोजगार के अवसर मिलें। उन्होंने बताया कि झारखंड में 16 लाख से अधिक MSME हैं, जिनमें 8 लाख से ज्यादा सूक्ष्म इकाइयां हैं और ये 60 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दे रही हैं।

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निवेश से रोजगार बढ़ाने की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने बताया कि नई दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कन्सलटेशन के बाद उद्योग, पर्यटन, IT, AI, आधारभूत संरचना और कौशल विकास के क्षेत्र में करीब 1 लाख करोड़ के निवेश के लिए 10 एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं। इन प्रस्तावित निवेशों से 22 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद जताई गई। मुख्यमंत्री के भाषण में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को केवल कृषि उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय खेत से बाजार, किसान से कृषि-उद्यमी और स्थानीय उत्पाद से ब्रांड तक ले जाने की दिशा पर जोर रहा।
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