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Panchayat Darpan

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गोड्डा में मशरूम की खेती ने बदली महिलाओं की राह, 20 गांवों के 500 से अधिक ग्रामीणों को मिला प्रशिक्षण

गोड्डा। अदाणी फाउंडेशन की अदाणी अन्नपूर्णा पहल के तहत गोड्डा में मशरूम उत्पादन ग्रामीण आजीविका का नया जरिया बनकर सामने आया है। अब तक अदाणी पावर प्लांट, पाइपलाइन, रेलवे लाइन और आसपास के 20 गांवों के 500 से अधिक किसानों को ऑयस्टर मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कम लागत में उत्पादन और स्थानीय बाजार में बिक्री से किसानों को अतिरिक्त नकद आय का अवसर मिला है। खास तौर पर महिलाएं मशरूम उत्पादन के साथ इससे जुड़े मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार कर अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

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मिल्की और पैडी मशरूम से सालभर उत्पादन की तैयारी

वर्षभर उत्पादन बनाए रखने के लिए ऑयस्टर के साथ अब मिल्की और पैडी मशरूम की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। गर्म मौसम में इन दोनों प्रजातियों का उत्पादन संभव है। डुमरिया, मोतिया, बक्सारा और करनू पंचायत के 70 चयनित किसानों को मशरूम विशेषज्ञ संतोष कुमार ने उन्नत प्रशिक्षण दिया। इसमें वैज्ञानिक खेती, जैविक प्रक्रिया, स्पॉन प्रबंधन, बैग तैयार करना, कृषि अपशिष्ट का इस्तेमाल, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के तरीकों की जानकारी दी गई।

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1,000 बैग तैयार, 769 किलो मशरूम का उत्पादन

वर्तमान में डुमरिया, करनू, बसंतपुर, नयाबाद, गोविंदपुर, बक्सारा, मोतिया और रंगनिया के 70 किसान इस पहल से जुड़े हैं। किसानों ने अब तक 800 मिल्की और 200 पैडी मशरूम बैग तैयार किए हैं। इनसे 487 किलो मिल्की और 282 किलो पैडी मशरूम का उत्पादन हो चुका है। उत्पादित मशरूम का इस्तेमाल परिवार के भोजन में करने के साथ स्थानीय बाजार में बिक्री के लिए भी किया जा रहा है। इससे एक तरफ परिवार के आहार में प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ रही है, तो दूसरी ओर किसानों को सीधे नकद आमदनी मिल रही है।

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अचार और सूखे मशरूम से बढ़ेगी कमाई

पहल के तहत महिलाओं को मशरूम से अचार, सूखे मशरूम और दूसरे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल कच्चे मशरूम की बिक्री तक सीमित न रहकर गांव में ही छोटे उद्यम खड़े करना है। उदाहरण के तौर पर, ताजा मशरूम की बिक्री के साथ उसे सुखाकर या अचार के रूप में बेचने पर उत्पाद को अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। आगामी वर्ष करीब 300 अनुभवी उत्पादकों को मिल्की और पैडी मशरूम के उन्नत उत्पादन का प्रशिक्षण देने की योजना है।

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बटन मशरूम पर भी बढ़ेगा जोर

अदाणी फाउंडेशन किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और क्षेत्रीय सहयोग देता रहेगा। आगामी सर्दी में किसान फिर से ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन शुरू करेंगे, जबकि अचार और सूखे मशरूम तैयार करने का प्रशिक्षण भी जारी रहेगा। इस वर्ष बटन मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देने की योजना है। बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाले किसानों को उद्यमिता मॉडल से जोड़ने की तैयारी है, ताकि गोड्डा में मशरूम उत्पादन केवल मौसमी खेती न रहकर ग्रामीण परिवारों के लिए टिकाऊ आजीविका का साधन बन सके।

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