रांची: झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग ने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और पशुपालकों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत व्यावसायिक बकरा-बकरी पालन की नई योजना लागू की है इस महत्वाकांक्षी योजना के संचालन के लिए सरकार ने ₹30 करोड़ के बजट का प्रावधान किया है । योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में बकरी पालन को व्यावसायिक स्तर पर स्थापित कर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाना और मांस आपूर्ति के लिए अन्य राज्यों पर निर्भरता समाप्त करना है।
क्या है योजना?
मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत बड़े पैमाने पर बकरी पालन को प्रोत्साहित करने के लिए 100 बकरी और 5 बकरे (ब्लैक बंगाल नस्ल) की क्षमता वाली व्यावसायिक इकाई (फार्म) स्थापित की जाएगी
परियोजना की कुल लागत: प्रति फार्म कुल अनुमानित लागत ₹9.78 लाख (₹9,78,000) निर्धारित की गई है।
सरकारी अनुदान (सब्सिडी): सरकार द्वारा कुल लागत पर 70% यानी अधिकतम ₹6,84,600 (₹6.84 लाख) का अनुदान दिया जाएगा ।
लाभुकांश (लाभुक अंशदान): शेष 30% राशि (₹2,93,400) आवेदक को स्वयं लगानी होगी, जिसमें से न्यूनतम 15% राशि बैंक ऋण के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है ।
लक्ष्य: वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्यभर में कुल 437 फार्म स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें रांची में सर्वाधिक 47, जमशेदपुर व पलामू में 26-26, हजारीबाग में 25, चाईबासा में 23, दुमका में 22, गोड्डा में 20 और गढ़वा में 19 फार्म शामिल हैं।
अनुदान भुगतान की प्रक्रिया: अनुदान राशि का भुगतान डीबीटी (DBT) के माध्यम से दो किस्तों में किया जाएगा—प्रथम किस्त (40%) योजना स्वीकृत होने पर और द्वितीय किस्त (60%) शेड एवं आधारभूत संरचना का निर्माण पूरा होने के बाद दी जाएगी ।
किसे मिलेगा लाभ?
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदकों को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना होगा
मूल निवासी: आवेदक का झारखंड का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है ।
भूमि की शर्त: बकरी फार्म स्थापना के लिए कम से कम 50 डिसिमिल जमीन (निजी अथवा न्यूनतम 10 वर्षों की लीज पर) होनी चाहिए, जिस पर छायादार वृक्ष उपलब्ध हों।
अनुभव व प्रशिक्षण: आवेदक को बकरी पालन का पूर्व अनुभव होना चाहिए; बकरी पालन में प्रशिक्षित आवेदकों को चयन में प्राथमिकता दी जाएगी ।
पात्र समूह: व्यक्तिगत पशुपालकों के अलावा स्वयं सहायता समूह (SHG) और किसान उत्पादक संगठन (FPO) भी इस योजना के पात्र हैं ।
वित्तीय क्षमता: बैंक द्वारा जारी प्रमाण-पत्र या पिछले एक वर्ष का औसत बैंक बैलेंस तथा ऋण सहमति पत्र जमा करना होगा ।
शपथ पत्र: चयनित लाभुक को फार्म को न्यूनतम 10 वर्षों तक संचालित रखने का शपथ-पत्र देना अनिवार्य होगा ।
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क्या होगा फायदा?
कम पूंजी में बड़ा बिजनेस: 70% सरकारी अनुदान मिलने से पशुपालकों पर आर्थिक बोझ काफी कम हो जाता है और वे आसानी से बड़ा व्यवसाय शुरू कर सकते हैं ।
स्थानीय रोजगार व आय वृद्धि: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पशुपालकों की आय में सतत वृद्धि होगी ।
मांस उत्पादन में आत्मनिर्भरता: राज्य में बकरी पालन का व्यावसायिक ढांचा मजबूत होने से स्थानीय स्तर पर मांस की आपूर्ति बढ़ेगी और दूसरे राज्यों पर निर्भरता समाप्त होगी।
वैज्ञानिक देखरेख व महामारी नियंत्रण: फार्म में एपिडेमिक कंट्रोल (महामारी नियंत्रण) मानकों का पालन अनिवार्य रहेगा, जिसकी नियमित समीक्षा जिला पशुपालन पदाधिकारी द्वारा की जाएगी ।

कैसे ले सकते हैं योजना का लाभ?
आवेदन फॉर्म जमा करना: इच्छुक आवेदक निर्धारित प्रपत्र में आवेदन पत्र, स्व-घोषणा पत्र और शपथ पत्र भरकर अपने प्रखंड पशुपालन कार्यालय या जिला पशुपालन कार्यालय में जमा करें ।
आवश्यक दस्तावेज
आवेदन के साथ स्थानीय निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), 50 डिसिमिल भूमि की रसीद या लीज डीड, बैंक पासबुक/ऋण सहमति पत्र, प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, हालिया फोटो तथा ग्राम सभा/पंचायत स्तरीय समिति की सिफारिश की प्रति संलग्न करना अनिवार्य है ।
चयन की 4-स्तरीय प्रक्रिया
- चरण 1: प्रखंड/जिला पशुपालन कार्यालय में दस्तावेजों व प्रस्ताव की जांच
- चरण 2: विभागीय अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण (Site Inspection)
- चरण 3: योग्य प्रस्तावों की अनुशंसा पशुपालन निदेशक को भेजना
- चरण 4: निदेशालय स्तर पर गठित समिति द्वारा अंतिम चयन
अंशदान जमा करना
चयन की सूचना मिलने के 1 माह के भीतर लाभुक को अपना अंशदान बैंक के एस्क्रो खाते (Escrow Account) में जमा करना होगा, जिसके बाद अनुदान राशि हस्तांतरित की जाएगी ।
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