Skip to main content

Panchayat Darpan

|

पश्चिमी सिंहभूम जिले के कारो नदी के पानी में काले अंश मिले, ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी

पश्चिमी सिंहभूम। गुवा क्षेत्र से होकर बहने वाली कारो नदी के पानी में काले अंश दिखाई देने के बाद आसपास के ग्रामीणों ने नदी के पानी का इस्तेमाल बंद कर दिया है। नदी लंबे समय से ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों का प्रमुख जलस्रोत रही है। पानी की स्थिति बदलने की शिकायत के बाद शुक्रवार को झारखंड मजदूर संघर्ष संघ, किरीबुरू और ओडिशा मजदूर संघर्ष संघ, बोलानी के संयुक्त दल ने नदी का निरीक्षण किया और पानी का नमूना जांच के लिए लिया।

इसे भी पढ़ें: लाको बोदरा की जयंती आज : ‘हो’ भाषा को दी अपनी लिपि-व्याकरण, कहलाते हैं ‘वारंग क्षिति’ के जनक

निरीक्षण के दौरान झारखंड मजदूर संघर्ष संघ, किरीबुरू के महामंत्री राजेंद्र सिंधिया नदी में उतरे और पानी की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पानी का नमूना बोतल में सुरक्षित रखा। नदी का जलस्तर कम होने के कारण पानी के अलावा पत्थरों और किनारे के आसपास भी काले अंश के निशान दिखाई दिए। ओडिशा मजदूर संघर्ष संघ, बोलानी के महामंत्री शिवाशीष नंद ने बताया कि मामले की जानकारी ओडिशा प्रशासन को भी दी गई है। संयुक्त दल ने नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं भी जानीं।

नदी का पानी बंद होने से बढ़ी घरेलू परेशानी

ग्रामीणों के अनुसार, कारो नदी का पानी रोजमर्रा के कई कामों में इस्तेमाल होता था। पानी का रंग और स्थिति बदलने के बाद उन्होंने इसका उपयोग रोक दिया है। इससे स्नान समेत घरेलू जरूरतों के लिए परेशानी बढ़ गई है। ग्रामीणों ने बताया कि नलकूप से मिलने वाला पानी सीमित मात्रा में उपलब्ध है और उसे मुख्य रूप से पीने के लिए सुरक्षित रखना पड़ता है। ऐसे में नदी के पानी का इस्तेमाल बंद होने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

जांच से ही स्पष्ट होगा काले अंश का स्रोत

नदी के पानी की गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट होने तक सेल की ओर से भी अपने इंटेक को बंद किए जाने की बात सामने आई है। स्थानीय सरपंच और जिला प्रदूषण नियंत्रण विभाग को भी मामले की जानकारी दी गई है। वहीं, ओडिशा वन विभाग की टीम ने पचेरी क्षेत्र में कारो नदी का निरीक्षण किया है और रिपोर्ट राज्य प्रदूषण नियंत्रण विभाग को भेजने की बात कही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नदी में मिले काले अंश का स्रोत क्या है और इसका पानी की गुणवत्ता पर कितना असर पड़ा है। इसकी वास्तविक स्थिति पानी के नमूने की जांच के बाद ही सामने आएगी।

इसे भी पढ़ें: एल नीनो के खतरे के बीच भारत ने रबी सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य किया निर्धारित

राजेंद्र सिंधिया और शिवाशीष नंद ने नदी में काले अंश के स्रोत की निष्पक्ष जांच कराने और कारण सामने आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि कारो नदी पर निर्भर ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए पानी के नमूने की जांच जल्द होनी चाहिए, ताकि पानी के प्रभावित होने के कारण और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम स्पष्ट हो सकें।