झारखंड में इस बार मानसून ने राज्य को औसत के करीब तो रखा, लेकिन बारिश का वितरण चिंता बढ़ाने वाला रहा। 30 सितंबर को मानसून अवधि समाप्त होने तक राज्य में सामान्य 1022.0 मिमी के मुकाबले 1005.7 मिमी बारिश दर्ज की गयी, जो सामान्य से दो फीसदी कम है। दक्षिण-पश्चिम मानसून 12 जून को झारखंड पहुंचा और करीब 111 दिनों तक सक्रिय रहा। मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, पूरे राज्य में मानसून की बारिश सामान्य रही, लेकिन जिलावार आंकड़े असमान तस्वीर दिखाते हैं। राज्य के आठ जिले कम बारिश के कारण रेड जोन में हैं। इनमें पाकुड़, देवघर, कोडरमा, हजारीबाग, चतरा, पलामू, गोड्डा और गुमला शामिल हैं। वहीं, 14 जिलों में बारिश सामान्य के करीब रही। पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गयी। मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 15 अक्तूबर तक इसके पूरी तरह लौटने की संभावना है।
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जून में सूखा, अगस्त-सितंबर ने संभाली स्थिति
इस बार मानसून की शुरुआत कमजोर रही। जून में सामान्य से 58 फीसदी कम बारिश हुई। इसके बाद अगस्त में सामान्य से 26 फीसदी और सितंबर में 15 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गयी। इस अतिरिक्त बारिश से शुरुआती कमी काफी हद तक पूरी हुई और पूरे मानसून की बारिश सामान्य के करीब पहुंच गयी। जिलावार स्थिति देखें तो पश्चिमी सिंहभूम में सामान्य से 47 फीसदी अधिक बारिश हुई, जबकि राजधानी रांची में भी 18 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गयी। इसके विपरीत पाकुड़ सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां सामान्य से 52 फीसदी कम बारिश हुई। चतरा में 36 फीसदी, देवघर में 29 फीसदी, गुमला में 26 फीसदी, गोड्डा में 24 फीसदी, कोडरमा में 22 फीसदी तथा हजारीबाग और पलामू में 20-20 फीसदी कम बारिश हुई। लगातार सूखे जैसे हालात वाले 2018, 2022 और 2023 के बाद इस वर्ष राज्य में बारिश सामान्य के करीब पहुंची है। हालांकि, कम बारिश वाले जिलों में जल उपलब्धता और खेती को लेकर किसानों की चिंता बनी हुई है।
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10 साल का रिकॉर्ड: आठ वर्ष सामान्य से नीचे
पिछले एक दशक के आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में मानसूनी बारिश का वितरण लगातार उतार-चढ़ाव वाला रहा है। वर्ष 2026 में 1005.7 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से दो फीसदी कम है। 2025 में 1199.4 मिमी बारिश के साथ सामान्य से 17 फीसदी अधिक वर्षा हुई थी। 2024 में 1011.6 मिमी बारिश हुई, जो एक फीसदी कम थी। 2023 में 755.7 मिमी यानी 26 फीसदी कम, 2022 में 817.6 मिमी यानी 20 फीसदी कम बारिश हुई थी। 2021 में 1041.5 मिमी बारिश हुई, जो दो फीसदी अधिक थी। 2020 में 898.3 मिमी यानी 15 फीसदी, 2019 में 858.9 मिमी यानी 19 फीसदी और 2018 में 785.0 मिमी यानी 28 फीसदी कम बारिश हुई। 2017 में भी 988.2 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से नौ फीसदी कम थी। वहीं 2016 में 1097.0 मिमी बारिश सामान्य से 0.5 फीसदी अधिक रही। आंकड़ों से स्पष्ट है कि दस साल की अवधि में अधिकांश वर्षों में राज्य को सामान्य से कम बारिश का सामना करना पड़ा है।
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जलाशयों में 61.33% पानी, खरीफ फसल आच्छादन 80.93%
असमान बारिश का असर राज्य के जलाशयों में भी दिख रहा है। छह प्रमुख जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का 61.33 फीसदी पानी उपलब्ध है। यह पिछले 10 वर्षों के सामान्य औसत से 23.59 फीसदी कम है। इन जलाशयों की लाइव भंडारण क्षमता 2.012 बिलियन घनमीटर है, जबकि वर्तमान में 1.234 बीसीएम पानी मौजूद है। हालांकि मानसून की बारिश और जलाशयों में उपलब्ध पानी के बीच कृषि क्षेत्र में खरीफ फसलों का आच्छादन लक्ष्य के मुकाबले 80.93 फीसदी रहा। खरीफ 2026-27 में राज्य में 2,853.955 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसल लगाने का लक्ष्य निर्धारित था। इसके मुकाबले 2,309.6 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई और रोपाई पूरी हो चुकी है। इस तरह मानसून की कुल बारिश सामान्य के करीब रहने के बावजूद जिलों के बीच बारिश का बड़ा अंतर जल प्रबंधन और कृषि के लिए चुनौती बना हुआ है।
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