देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मत्स्य विभाग ने मछुआरों और मछली किसानों के सशक्तीकरण तथा भारत की ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। 15 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में देशभर से आए मछुआरों और मछली किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम को ‘150 Years of Vande Mataram’ और ‘Yuva Shakti for Viksit Bharat@2047’ की थीम से जोड़ा गया। विभाग ने कहा कि आने वाले वर्षों में युवा, आधुनिक तकनीक और उद्यमिता मत्स्य क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे।
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3 करोड़ लोगों की आजीविका से जुड़ा है क्षेत्र
मत्स्य और जलीय कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था के साथ करीब 3 करोड़ मछुआरों और मछली किसानों की आजीविका से जुड़ा है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है और वैश्विक मछली उत्पादन में करीब 8 प्रतिशत योगदान देता है। देश एक्वाकल्चर उत्पादन में दूसरे स्थान पर है और झींगा उत्पादन एवं निर्यात में भी अग्रणी है। सरकार के अनुसार 2015 से अब तक ब्लू रिवोल्यूशन, Fisheries and Aquaculture Infrastructure Development Fund (FIDF), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और PM-MKSSY जैसी पहलों के माध्यम से इस क्षेत्र में कुल 39,272 करोड़ का निवेश किया गया है।
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अब मछली पालन से आगे बाजार और तकनीक पर जोर
मत्स्य क्षेत्र में अब केवल उत्पादन बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है। आधुनिक एक्वाकल्चर, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, कोल्ड चेन, वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग और निर्यात जैसे क्षेत्रों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर एक मछली किसान यदि आधुनिक तकनीक से उत्पादन बढ़ाता है, लेकिन उसके पास सुरक्षित भंडारण और बाजार तक पहुंच नहीं है, तो उसकी अतिरिक्त उपज का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। इसलिए उत्पादन से लेकर बाजार तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने की जरूरत पर विभाग ने जोर दिया है।
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PM-MKSSY से छोटे कारोबार और मछली किसानों को सहारा
प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) को 2024 में चार साल के लिए मंजूरी दी गई थी। इसके लिए 6,000 करोड़ का अनुमानित परिव्यय रखा गया है। योजना के तहत मछुआरों, मछली किसानों, मछली विक्रेताओं और छोटे मत्स्य एवं जलीय कृषि उद्यमों को संस्थागत वित्त तक पहुंच, एक्वाकल्चर बीमा और प्रदर्शन आधारित सहायता देने का प्रावधान है। योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा असंगठित क्षेत्र को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ना भी है। इसके लिए National Fisheries Digital Platform के जरिए काम आधारित डिजिटल पहचान बनाने की व्यवस्था की गई है।
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बिहार समेत पांच लाभार्थियों को राष्ट्रपति भवन का निमंत्रण
स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद PM-MKSSY के लाभार्थियों और उनके जीवनसाथियों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। असम के नितुल चंद्र दास, ओडिशा के सुरेश चंद्र राउत, महाराष्ट्र के एकनाथ रामा मुकाने, उत्तर प्रदेश के आकाश सिंह और बिहार की मीशा सिंह को राष्ट्रपति के ‘At-Home’ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया। लाभार्थियों ने बताया कि सरकारी सहायता से उन्होंने आजीविका में सुधार, आधुनिक तकनीक अपनाने और आय के नए अवसर विकसित करने में मदद मिली। विभाग ने कहा कि मछुआरों, मछली किसानों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से मत्स्य क्षेत्र को टिकाऊ और मजबूत ब्लू इकोनॉमी का अहम आधार बनाने की दिशा में काम जारी रहेगा।
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