झारखंड के पलामू जिला अंतर्गत छतरपुर से एक झकझोर कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यह एक ऐसी तस्वीर है जो इंसानियत को शर्मसार कर देगी और सोचने के लिए मजबूर कर देगी की क्या हम वाकई इंसान है या जानवरों से भी गए गुजरे हैं, जानवरों से भी गए गुजरे इसलिए क्योंकि जानवर भी अपने दुधमुहे बच्चों को सीन से चिपकाए फिरते हैं और जब तक वह अपने पैरो पर खड़ा नहीं हो जाता है उसके लिए खाने पीने की पूरी व्यवस्था करते हैं।
तीन घंटे की थी बच्ची
पर छतरपुर से जो तस्वीर आई वो बेहद ही भयावह है। तस्वीर एक नवजात बच्ची की है। जिसका जन्म सिर्फ तीन घंटे पहले हुआ है और उसका नाल भी नहीं कटा है। उस बच्ची को जिसे मां की गर्मी चाहिए और ममता का दूध चाहिए था, वह बच्ची बारिश औऱ ठिठुरन भरी रात में खेत के मेड़ पर पड़ी रो रही थी। उसके बदन पर ना ही कपड़े थे और ना ही उसे बारिश के बचावने के लिए कोई छत, धान के के खेत के मेड़ पर वह नन्हीं सी जान तड़प रही थी।
पुलिस कर रही मामले की जांच
पास में ही एक देवी मंदिर था। बच्ची के साथ उसकी मां और दो अन्य महिलाएं भी थी । महिला के पास से सिंदूर, टिकली, कंघी और पूजा-पाठ की सामग्री मिली है। हालांकि, बच्ची को मंदिर के पास ले जाने के पीछे असल मंशा क्या थी, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन स्थानीय लोग यह कयास लगा रहे हैं कि बच्ची को बली देने के लिए वहां पर लाया गया था। बताया गया कि जिस महिला ने बच्ची को जन्म दिया उसके पहले से दो बेटे और दो बेटियां हैं। यह उनकी पांचवीं संतान है। फिलहाल नन्ही बच्ची अस्पताल में जिंदगी के लिए जूझ रही है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।