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चिकित्सा उपकरणों के नियम बदले, आउटसोर्स स्टरलाइजेशन के लिए अलग लाइसेंस की जरूरत खत्म

केंद्र सरकार ने चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में कारोबार और अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए चिकित्सा उपकरण नियमावली, 2017 में बदलाव किया है। संशोधित प्रावधानों के तहत जिन निर्माताओं के पास अपनी स्टरलाइजेशन सुविधा नहीं है और वे वैध लाइसेंस वाली बाहरी सुविधा से अपने उत्पादों का स्टरलाइजेशन कराते हैं, उन्हें इस गतिविधि के लिए अलग लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी।

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दोहराव वाली लाइसेंस प्रक्रिया से मिलेगी राहत

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव से निर्माताओं पर दोहराव वाली लाइसेंस प्रक्रिया का बोझ कम होगा। इसके साथ ही प्रशासनिक प्रक्रिया, अनुपालन लागत और काम पूरा करने में लगने वाला समय भी घटने की उम्मीद है। खासकर छोटे और ऐसे निर्माताओं को राहत मिलेगी, जो अपनी स्टरलाइजेशन सुविधा स्थापित करने के बजाय लाइसेंस प्राप्त बाहरी एजेंसी की सेवाएं लेते हैं।

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लेबलिंग में बदलाव के लिए छह महीने का समय

संशोधन में नई लेबलिंग आवश्यकताओं को लागू करने के लिए छह महीने की संक्रमण अवधि दी गई है। इस दौरान कंपनियां अपनी लेबलिंग, पैकेजिंग और संबंधित प्रक्रियाओं में जरूरी बदलाव कर सकेंगी। सरकार का यह कदम अचानक अनुपालन का दबाव डालने के बजाय कंपनियों को बदलाव के लिए पर्याप्त समय देने वाला है। नियमावली के नियम 63 में भी संशोधन किया गया है।

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ईयू में मंजूर उपकरणों के लिए भारत में प्रक्रिया आसान

संशोधन के तहत यूरोपीय संघ (EU) को मान्यता प्राप्त कड़े नियामक क्षेत्राधिकारों की सूची में शामिल किया गया है। इससे ईयू में पहले से मंजूर पात्र चिकित्सा उपकरणों को भारत में नैदानिक जांच संबंधी कुछ आवश्यकताओं से छूट मिल सकेगी। इस सूची में पहले अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जापान शामिल थे। सरकार का कहना है कि इससे उन्नत और नए चिकित्सा उपकरणों की भारत में उपलब्धता तेज हो सकती है, जबकि गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन से जुड़े नियामक मानक कायम रहेंगे।

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उद्योग के लिए आसान नियम, मरीजों के लिए तेज पहुंच

इन बदलावों का सीधा असर चिकित्सा उपकरण निर्माताओं की लागत और नियामकीय प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अलग लाइसेंस की जरूरत खत्म होने और कुछ मंजूर उपकरणों के लिए प्रक्रिया आसान होने से बाजार में नए उत्पाद आने में समय घट सकता है। सरकार के मुताबिक सुधारों का उद्देश्य केवल कारोबारी सुगमता बढ़ाना नहीं, बल्कि चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में पारदर्शिता, नियामकीय पूर्वानुमेयता और प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना भी है।

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